Friday, October 30, 2009

परिवर्तन



एक रोज़ तमन्ना थी.......


आसमां छू लेने की।


वो तमन्ना आज भी है


की छू लूँ मैं आसमां


पर लगने लगा है .........


लाके कोई रख दे


उसे मेरे सिरहाने।

Wednesday, October 28, 2009





इल्तिजा मौत तुझसे है इतनी,


देके दस्तक मेरे दर पे आना।


जिंदगी ये गुज़ारिश है तुझसे,


सुनके दस्तक वहाँ ले जाना,


कोई साया भी हो ना जहाँ पर,


फिर मिलकर मुझे तुम सुलाना।



न डाले कफन कोई ऐसा...


पीछे जिसका सुनाएं वो ताना,


कौन आँसू बहाएगा मुझपर,


है खुदगर्ज़ ये तो जमाना



भीड़ में से अँगुली पकड़ कर


तन्हाइयों में ले जाना


और गोद में रखकर मेरा सर,


नींद अंतिम मुझे तुम सुलाना।

Monday, October 26, 2009

संशय (एक पुरानी कविता)

निशा द्वंद्व से आदृत हो
तुमको पुकारा करते हैं
वंचित कर दो ना दामन से
इस संशय से डरते हैं।

हो निकट कभी तो मूक रहें
पृथक हुए अश्रु झरते हैं।
य़ह द्वेषी समय न पृथक कर दे
इस संशय से डरते हैं।

कच्ची माटी की गागर में
प्रेम नीर भरते हैं ,
छूटे ना गागर हाथों से
इस संशय से डरते हैं।

विरह भाव समय असमय
यूँही विह्वल करते हैं
यह द्वेषी समय न पृथक कर दे
इस संशय से डरते हैं।



Tuesday, October 20, 2009

सीमा


क्षितिज के आगे,

जहाँ और भी हैं

समझो मगर,

मेरी सीमा यही है।

उस पार सरिता के,

फूलों की वादी

सरिता मगर,

सागर से बड़ी है।

हाथ बढ़ा लें ,

तो पा जाएं तारे,

छूटेंगे उससे

रिश्ते तो सारे

रह जाएँगे

सब साथी हमारे

जो भी है मेरा,

सब बस यही है,

उस पार दुनिया

मेरी नहीं है।